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हाइलाइट्स
हर मनोकामना पूरी करने के लिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत करना चाहिए.
सकट चौथ का व्रत करने से हर संकट मिट जाता है.
Sakat Chauth 2023: संकट चौथ व्रत एक ऐसा व्रत है जिसे संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए रखा जाता है. हिंदू पंचांग की माने तो प्रत्येक वर्ष माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन संकट चौथ का व्रत रखना चाहिए. इस दिन व्रत रखने की परंपरा सदियों पुरानी है. इसे संकट चौथ के अलावा संकष्टी चतुर्थी, तिलकुट, माघ चतुर्थी भी कहा जाता है, मान्यता है कि सकट चौथ के दिन भगवान गणेश का पूजन करने से कष्टों का अंत होता है, और संतान के जीवन में आने वाली सभी समस्याएं भी समाप्त होती हैं. पौराणिक हिंदू कथाओं के अनुसार सकट चौथ का व्रत माता पार्वती ने कार्तिकेय से मिलने और भगवान शंकर ने माता पार्वती को खुश करने के लिए किया था. भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं सकट चौथ की कथा के विषय में.
संकट चतुर्थी व्रत कथा
संकट चतुर्थी के संबंध में हिंदू धर्म पुराणों में अनेकों कथाएं पढ़ने को मिलती हैं. इनमें सर्वाधिक प्रचलित और पौराणिक कथा के अनुसार जब देवताओं पर संकट आया, तब वे सहायता के लिए भगवान शिव के पास पहुंचे. उस वक्त भगवान शिव के साथ भगवान गणेश और कार्तिकेय दोनों मौजूद थे. भगवान शिव ने भगवान कार्तिकेय और भगवान गणेश से देवताओं की समस्याओं का समाधान कौन करेगा, ये पूछा. इस पर दोनों ने स्वयं को सक्षम बताते हुए संकट का निवारण करने की बात कही.
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उनकी बात सुनकर भगवान शिव ने दोनों की परीक्षा लेने का निर्णय लेते हुए कहा, कि दोनों में से जो सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके आएगा, वही देवताओं की सहायता करने जाएगा. पिता का आदेश सुनकर कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर बैठकर पृथ्वी की परिक्रमा करने चल पड़े. भगवान गणेश ने युक्ति लगाई और अपने माता-पिता की 7 परिक्रमा करके वापस आकर अपने स्थान पर बैठ गए. भगवान गणेश से भगवान शिव प्रसन्न हुए और गणेश जी को ही देवताओं का संकट दूर करने की आज्ञा दी. साथ ही यह भी कहा कि चतुर्थी के दिन जो व्यक्ति भगवान गणेश की पूजन करेगा, और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देगा, उस व्यक्ति के जीवन के सारे संकट दूर होंगे.
-संकट चतुर्थी पूजन विधि
संकट चतुर्थी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर सूर्य को जल का अर्ध्य देना उत्तम होता है.
इसके बाद अपने पूजा स्थान को स्वच्छ करें और दैनिक पूजा करने के बाद संकट चतुर्थी व्रत का संकल्प लें. अपने दाहिने हाथ में जल लेकर उसमें सिक्का, पूजा की सुपारी, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत करने का संकल्प लें.
आप जिस कार्य के लिए व्रत कर रहे हैं. उसका भी मान में ध्यान करें.
इसके बाद भगवान गणेश का षोडशोपचार पूजन करें.
इस व्रत में भगवान गणेश की पूजा की जाती है, और गणेश जी को दूर्वा, सिंदूर, पुष्प आदि अर्पित करें.
सूर्यास्त के समय भगवान गणेश का पूजन करें और जोत जलाएं. चतुर्थी की कथा सुने या पढ़ें. इस व्रत में चंद्रोदय होने तक जल ग्रहण नहीं किया जाता.
चंद्रोदय होने पर चंद्रमा के दर्शन एवं पूजन करें, साथ ही चंद्रमा को अर्घ्य दें. इसके बाद भगवान गणेश को नैवेद्य लगाकर भोजन ग्रहण करें.
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FIRST PUBLISHED : May 08, 2023, 06:30 IST
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