[ad_1]
ऐप पर पढ़ें
Manipur Incident: हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर की भयानक तस्वीरों के आने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीजेपी विधायक को करंट देकर मारने की कोशिश की गई, दो कुकी महिलाओं को नग्न कर सड़क पर घुमाया गया। स्वतंत्रता सेनानी की 80 वर्षीय पत्नी को घर समेत जिंदा जला दिया। इन्हीं भयावह और वीभत्स घटनाओं में एक कांगपोकपी क्षेत्र में हुई दो आदिवासी लड़कियों के साथ गैंगरेप और मर्डर का भी है। एक की मां अभी भी दरवाजे पर टकटकी लगाए बेटी का इंतजार कर रही है। वो कहती हैं घटना के दिन बेटी के फोन से एक ने पूछा था कि लड़की जिंदा चाहिए या मुर्दा?”
मणिपुर में 3 मई को जातीय झड़पें हुईं थी। मणिपुर में हजारों लोगों के जख्म अभी भी हरे हैं। राज्य के कई इलाकों में हालात अभी भी शांत नहीं हो पाए हैं। मणिपुर के एक ही गांव की 21 और 24 साल की दो महिलाएं जो इम्फाल में एक कार धोने का काम करती थी, 4 मई को भीड़ ने उनका कथित तौर पर अपहरण किया, गैंगरेप किया और मर्डर कर लाश सड़क पर फेंक दी। घटना के बाद, पीड़ितों में से एक की मां ने 5 मई को सैकुल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने 16 मई को एफआईआर दर्ज की।
हालांकि, इस मामले में सवाल के जवाब में मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह का कहना है कि राज्य भर में दर्ज 6,000 से अधिक एफआईआर में बलात्कार का सिर्फ एक मामला था।
मां की आपबीती
पीड़ितों में से एक की मां ने इंडिया टुडे को बताया कि संघर्ष से पहले उनकी बेटी अपने भाई-बहनों की मदद के लिए कार धोने का काम करती थी। वह उसी गांव की एक अन्य महिला के साथ किराए के मकान में रहती थी। हिंसा शुरू होने के एक दिन बाद पीड़िता की मां अपनी बेटी से संपर्क नहीं कर पाई। उन्होंने कहा, “जब हिंसा शुरू हुई, तो मैं चिंतित हो गई, इसलिए मैं बार-बार अपनी बेटी को फोन करती रही। हालांकि, उसने फोन नहीं उठाया। बाद में, एक मैतेई महिला ने फोन उठाया और मुझसे पूछा कि मैं अपनी बेटी को जिंदा या मृत में क्या चाहती हूं? उसने फिर फोन काट दिया।” उन्होंने कहा, उसके बाद हमें पता चला कि दोनों की हत्या कर दी गई है।
बेटी का अभी भी इंतजार
जब उनसे पूछा गया कि उनकी बेटी की मौत से पहले उनके साथ क्या हुआ था, इसके बारे में उन्हें कैसे पता चला, तो पीड़िता की मां ने कहा कि उन्हें बाद तक इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं थी। घटना के संबंध में मामला दर्ज होने के बाद की गई कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ”हमें पुलिस या किसी अन्य अधिकारी से मामले के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है।” वो कहती हैं कि बेटी की लाश अभी तक नहीं मिली है, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि वो वापस जरूर आएगी।
दंगाईयों ने जला दिए गांव
पीड़िता की मां ने कहा कि जब उन्हें अपनी बेटी की मौत की खबर मिली तो उनके गांव पर हमला किया गया और उन्हें जला दिया गया। उनके परिवार को जंगल में भागना पड़ा और फिर एक राहत शिविर में रहना पड़ा। गौरतलब है कि 3 मई को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 150 से अधिक लोगों की जान चली गई है और कई लोग घायल हो गए हैं। हिंसा में 50 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं।
[ad_2]
Source link