Home National बूथ मैनेजमेंट पड़ेगा सब पर भारी? 2024 को लेकर बीजेपी एक्टिव; UP के लिए बन रहा नया खाका

बूथ मैनेजमेंट पड़ेगा सब पर भारी? 2024 को लेकर बीजेपी एक्टिव; UP के लिए बन रहा नया खाका

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बूथ मैनेजमेंट पड़ेगा सब पर भारी? 2024 को लेकर बीजेपी एक्टिव; UP के लिए बन रहा नया खाका

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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बूथ मैनेजमेंट में माहिर माना जाता है। ‘मेरा बूथ-सबसे मजबूत’ के मूल मंत्र के साथ सत्तारूढ़ दल उत्तर प्रदेश में फिर से सक्रिय हो गया है। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश में नए सिरे से बूथ समितियों का गठन किया जा रहा है। निचली यूनिट्स से 10 फरवरी तक बूथ परिसीमन का ब्योरा मांगा गया है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) धर्मपाल सिंह ने प्रदेश के सभी क्षेत्रीय प्रभारी, क्षेत्रीय अध्यक्ष, जिला प्रभारी और जिला अध्यक्षों को पत्र भेजा है। इसके जरिए 5 जनवरी, 2023 को प्रकाशित मतदाता सूची के आधार पर बूथ समितियों के गठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

धर्मपाल सिंह ने अपने पत्र में कहा कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान अधिकतम 1200 मतदाताओं पर एक बूथ बना था, लेकिन 4 जनवरी 2023 को प्रकाशित मतदाता सूची के अनुसार हर बूथ पर अब 1500 मतदाता होंगे। इससे प्रदेश में करीब 13 हजार बूथ कम हो गए हैं और बूथों की क्रम संख्या में व्यापक बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से हमारी संगठनात्मक मैपिंग भी फिर बदलेगी। इसलिए मंडल, शक्ति केंद्र और बूथ परिसीमन 5 जनवरी 2023 को प्रकाशित मतदाता सूची के अनुसार नए सिरे से करना है।

’13 हजार बूथ समितियों की संख्या घटेगी’

प्रदेश महामंत्री (संगठन) ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेश में मंडल और शक्ति केंद्रों की संख्या पहले इतनी ही रहेगी। जहां भी बूथ घट या बढ़ रहे हैं, उनको उसी शक्ति केंद्र में शामिल कर देना है, अलग से कोई शक्ति केंद्र गठित नहीं करना है। धर्मपाल सिंह ने पदाधिकारियों को परिसीमन के लिए खाका भेजा है, जिसे पूरा करके 10 फरवरी तक राज्य मुख्यालय की चुनाव प्रबंधन इकाई को भेजने के निर्देश दिए हैं। BJP के सीनियर पदाधिकारी ने बताया कि पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे में 1 लाख 76 हजार से अधिक बूथों पर संगठन बनाया था, लेकिन नए सिरे से होने वाले बदलाव में अब करीब 13 हजार बूथ समितियों की संख्या घट जाएगी।

‘यूपी की सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य’

भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में एक शक्ति केन्द्र पर 5 से 6 बूथ होते हैं। शक्ति केंद्रों के प्रभारी और संयोजक इनकी निगरानी करते हैं। उत्तर प्रदेश में भाजपा के 27 हजार से अधिक शक्ति केंद्र, 1918 मंडल और 98  संगठनात्मक जिले हैं, जबकि पूरे प्रदेश को काशी, गोरखपुर, अवध, कानपुर-बुंदेलखंड, ब्रज और पश्चिम कुल 6 क्षेत्रों में बांटकर संगठन का खाका तैयार हुआ है। बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति की पिछले माह लखनऊ में बैठक में हुई थी। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए पदाधिकारियों को प्रदेश की सभी 80 सीटें जीतने का लक्ष्य सौंपा।

उपचुनाव में आजमगढ़, रामपुर सीट BJP ने छीनी

मालूम हो कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने अपना दल (सोनेलाल) के साथ गठबंधन कर राज्य की 80 सीटों में से 64 सीटें जीतीं। कांग्रेस ने एक, सपा ने 5 और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने 10 सीटें जीती थीं। तब सपा-बसपा ने मिलकर गठबंधन में चुनाव लड़ा था। हालांकि, पिछले वर्ष हुए उपचुनावों में आजमगढ़ और रामपुर सीट भाजपा ने सपा के कब्जे से छीन ली, लेकिन मैनपुरी सीट बचाने में सपा कामयाब रही।

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