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अगले साल यानी 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक लगाने की उम्मीद कर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उत्तर प्रदेश (यूपी) के लिए खास प्लान बनाया है। लोकसभा सीटों के लिहाज से देश के सबसे राज्य यूपी में निकाय चुनाव होने वाले हैं। बताया जा रहा है कि इन चुनावों में भाजपा के गेम प्लान की झलक देखने को मिल सकती है। उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयोग ने रविवार को राज्य में नगरीय निकायों के चुनाव की अधिसूचना जारी करते हुए कहा कि चुनाव दो चरणों में चार मई तथा 11 मई को होगा जबकि 13 मई को मतों की गिनती की होगी।
राज्य की सत्ताधारी भाजपा यूपी निकाय चुनावों में खास प्लान के साथ उतरने की योजना बना रही है। भाजपा द्वारा सामान्य सीटों पर ओबीसी उम्मीदवारों को मैदान में उतारने और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट देने की संभावना है। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों और पार्टी के शीर्ष राज्य इकाई के नेताओं के साथ बैठक के दौरान इन मुद्दों पर सहमति बनी।
योगी ने बुलाई थी बैठक
द इंडियन एक्सप्रेस ने पार्टी के एक नेता के हवाले से लिखा कि राज्य चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की तारीखों की घोषणा के एक दिन बाद मुख्यमंत्री ने स्थानीय शहरी निकाय चुनावों के लिए पार्टी की तैयारियों पर चर्चा करने के लिए भाजपा नेताओं की एक बैठक बुलाई थी। बैठक में मंत्रियों और पार्टी नेताओं के सुझावों पर विचार किया गया।
भाजपा अगले साल के लोकसभा चुनावों से पहले ओबीसी का विश्वास जीतना चाहती है। रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक में, यह सुझाव दिया गया था कि अगर ओबीसी उम्मीदवारों को मैदान में उतारने से अनारक्षित सीटें या सामान्य श्रेणी की सीटें जीतने की संभावना है, तो यह किया जाना चाहिए। हालांकि यह सब अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए आरक्षित 27 प्रतिशत सीटों से अलग होगा।
पसमांदा मुस्लिमों को मिल सकता है टिकट
रिपोर्टों के मुताबिक अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारने का भी फैसला किया गया है। पार्टी अल्पसंख्यक समुदाय की महत्वपूर्ण उपस्थिति वाली सीटों पर पसमांदा या किसी अन्य मुस्लिम को चुन सकती है। बीजेपी के कोर हिंदू वोटर भी उन्हें वोट कर सकते हैं। बीजेपी ने पिछले शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में कुछ सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था, लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं थे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को अपने गृह जिले के दौरे में निकट भविष्य में होने वाले नगर निकाय चुनाव के लिए कार्यकर्ताओं को उत्साहित करते हुए कहा कि हमें पहले निकाय और फिर लोकसभा चुनाव में कमल (भाजपा का चुनाव चिन्ह) ही कमल खिलाना है और इसके लिए रणनीति बनानी अभी से प्रारंभ हो जानी चाहिए।
मंत्रियों को सौंपे गए जिले
इस बीच, मंगलवार से, जिन मंत्रियों को भाजपा की चुनावी तैयारियों के लिए विशेष जिले सौंपे गए हैं, वे पहले चरण (4 मई) के मतदान वाले निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा शुरू करेंगे। भाजपा की तैयारी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। क्षेत्र दौरे के दौरान मंत्री जिला कोर समितियों की बैठकें करेंगे और स्थानीय पार्टी पदाधिकारियों से मिलेंगे। वे कार्यकर्ताओं और जनता के साथ संवाद बनाए रखेंगे, उनकी शिकायतों को दूर करेंगे और महापौर, अध्यक्षों और वार्ड सदस्यों के लिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर भी चर्चा करेंगे।
14,684 पदों पर चुनाव
राज्य चुनाव आयुक्त मनोज कुमार ने बताया, “राज्य के 760 नगरीय निकाय चुनाव के अन्तर्गत कुल 14,684 पदों पर चुनाव होंगे।” उन्होंने बताया कि इसमें 17 महापौर, 1420 पार्षद, नगर पालिका परिषदों के 199 अध्यक्ष, नगर पालिका परिषदों के 5327 सदस्य, नगर पंचायतों के 544 अध्यक्ष और नगर पंचायतों के 7178 सदस्यों के निर्वाचन के लिये चुनाव होगा। चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद पूरे राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।
उन्होंने बताया कि प्रथम चरण में 11 अप्रैल से नामांकन पत्रों की खरीद और जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और यह 17 अप्रैल तक चलेगी। पहले चरण में नामांकन पत्रों की जांच 18 अप्रैल को और नामांकन वापसी के लिए 20 अप्रैल की तारीख तय की गयी है। आयोग ने चुनाव चिन्ह आवंटन के लिए 21 अप्रैल की तारीख तय की है। प्रथम चरण का मतदान चार मई को होगा।
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