Home World भारत पर नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड को घेरना पड़ा भारी, अपने ही जाल में फंसे चीन के ‘गुलाम’ केपी ओली

भारत पर नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड को घेरना पड़ा भारी, अपने ही जाल में फंसे चीन के ‘गुलाम’ केपी ओली

0
भारत पर नेपाली प्रधानमंत्री प्रचंड को घेरना पड़ा भारी, अपने ही जाल में फंसे चीन के ‘गुलाम’ केपी ओली

[ad_1]

काठमांडू: नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड अपने भारत के पहले दौरे के बाद से ही विपक्षी दलों के निशाने पर हैं। विपक्षी दल जहां कभी अखंड भारत के नक्‍शे तो कभी सीमा विवाद को लेकर उन्‍हें घेरने की कोशिश कर रहे हैं। इस बीच नेपाल की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपने ही जाल में बुरी तरह से फंस गए हैं। केपी ओली भारत का नाम लेकर प्रचंड की छवि खराब करना चाहते थे लेकिन यह उनको महंगा पड़ गया। दरअसल, ओली ने शनिवार को अरुण और फूकोट करनाली पनबिजली परियोजना को लेकर प्रचंड की आलोचना की और कहा कि नेपाली प्रधानमंत्री ने अपनी भारत यात्रा के दौरान ‘मूंगफली’ के बदले दोनों ही हाइड्रो प्रॉजेक्‍ट दे दिया।

प्रचंड की भारत यात्रा के बाद जारी बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच लोवर अरुण पनबिजली परियोजना को लेकर समझौते पर हस्‍ताक्षर हुआ है। भारत नेपाल से अगले 10 साल में 10 हजार मेगावाट बिजली खरीदने पर सहमत हुआ है। ओली ने इसको लेकर निशाना साधा और कहा कि प्रचंड ने दो नदियों फूकोट करनाली और अरुण को मूंगफली के बदले गिफ्ट कर दिया। उन्‍होंने कहा कि साल 2019 में जब मैं प्रधानमंत्री था तब मैंने फैसला किया था कि फुकोट करनाली प्रॉजेक्‍ट को नेपाल खुद ही विकसित करेगा।
Nepal News: कम्युनिस्ट प्रचंड के पशुपतिनाथ मंदिर जाने पर नेपाल में बवाल, प्रधानमंत्री कार्यालय को देनी पड़ी सफाई

खुद ओली ने भारतीय कंपनी को दिया था प्रॉजेक्‍ट

ओली ने कहा कि इस प्रॉजेक्‍ट को सस्‍ते में किया जा सकता था लेकिन अब इसे भारत को सौंपा जा रहा है। उन्‍होंने सवाल किया कि क्‍या प्रधानमंत्री बता सकते हैं कि किन शर्तों पर फूकोट को भारतीय कंपनी को सौंपा गया है। वर्तमान समय में इस प्रॉजेक्‍ट का सर्वे लाइसेंस भारतीय कंपनी विद्युत उत्‍पादन कंपनी लिमिटेड के पास है। नेपाली अखबार काठमांडू पोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक जिस लोअर अर्जुन प्रॉजेक्‍ट के लिए प्रचंड पर आरोप लगा रहे हैं, उसे खुद केपी ओली ने ही भारत की सरकारी कंपनी को देने के लिए कदम उठाया था।

प्रचंड की पार्टी ने कई मंदिरों को तोड़ा, अब भारत में महाकाल की दर पर नेपाली पीएम

ओली के प्रधानमंत्री रहने के दौरान इस प्रॉजेक्‍ट पर 11 जून, 2021 को भारत और नेपाल के बीच हस्‍ताक्षर हुआ था। ओली के पद छोड़ने से काफी पहले ही यह प्रॉजेक्‍ट भारतीय कंपनी को दे दिया गया था। नेपाली कांग्रेस के एक नेता ने ओली के झूठ पर कहा कि अब केपी ओली झूठ बोल रहे हैं ताकि खुद को राष्‍ट्रवादी दिखा सकें। इस तरह से ओली के झूठ की खुद ही नेपाली मीडिया ने पोल खोलकर रख दी है। यह वही केपी ओली हैं जो चीन के इशारे पर नाचते हुए नेपाल का नया राजनीतिक नक्‍शा जारी कर चुके हैं। इसमें उन्‍होंने कालापानी समेत विवादित इलाकों को नेपाल का दिखाया था।

[ad_2]

Source link