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मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने DGP को भेजा समन, अब 7 अगस्त को होगी सुनवाई

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मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने DGP को भेजा समन, अब 7 अगस्त को होगी सुनवाई

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manipur violence case- India TV Hindi

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मणिपुर हिंसा मामला

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को निर्देश दिया कि वह मुख्य मामले की सुनवाई होने तक मणिपुर वायरल वीडियो मामले में शामिल दो महिला पीड़ितों के बयानों की रिकॉर्डिंग को निलंबित कर दे। इसके साथ ही कोर्ट ने डीजीपी को समन भेजा है और शुक्रवार को जवाब देने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से पेश हुए भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी का कहना है कि सीमावर्ती इलाकों में ऐसी घटनाएं हो रही हैं जो बेहद परेशान करने वाली हैं। हमें कैलिब्रेटेड दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है। इस केस की सुनवाई अब 7 अगस्त को होगी। 

मणिपुर सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अब तक महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा से संबंधित 11 एफआईआर सीबीआई के पास जा चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उस रिपोर्ट को रिकॉर्ड किया है जो मणिपुर सरकार की ओर से दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि 25 जुलाई, 2023 तक 6496 एफआईआर दर्ज की गई हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने देखा स्टेटस रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने नोट किया कि आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार 150 मौतें हुईं, 502 घायल हुए, 5,101 मामले आगजनी की और 6,523 एफआईआर दर्ज की गईं। 252 लोगों को एफआईआर में गिरफ्तार किया गया और 1,247 लोगों को निवारक उपायों के तहत गिरफ्तार किया गया। स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 एफआईआर के सिलसिले में 7 गिरफ्तारियां की गई हैं।

सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि सभी पुलिस स्टेशनों के सभी अधिकारियों को महिलाओं और बच्चों द्वारा रिपोर्ट की गई यौन हिंसा के प्रति संवेदनशील होने का निर्देश दिया गया है। कार वॉश की घटना में जहां काम करने वाली आदिवासी महिलाओं के साथ कथित तौर पर बलात्कार किया गया और उनकी हत्या कर दी गई, मणिपुर सरकार का कहना है कि जांच चल रही है, 37 गवाहों से पूछताछ की गई है और कार वॉश के 14 अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।

कहा गया है कि एक किशोर सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोषियों पर शीघ्र मामला दर्ज करने के लिए एफआईआर को सीबीआई को स्थानांतरित कर दिया गया है।

कोर्ट ने की तीखी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बात बिल्कुल स्पष्ट है कि एफआईआर दर्ज करने में काफी देरी हुई है। मणिपुर में एक महिला को कार से बाहर खींचने और उसके बेटे की पीट-पीटकर हत्या करने की घटना का जिक्र करते हुए सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यह घटना 4 मई को हुई थी और एफआईआर 7 जुलाई को दर्ज की गई थी। सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा कि एक को छोड़कर ऐसा प्रतीत होता है- 2 FIR में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। इस मामले में जांच बहुत सुस्त है। दो महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई और बयान दर्ज नहीं किए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा कि वह मणिपुर वायरल वीडियो मामले में दो पीड़ित महिलाओं के बयान की रिकॉर्डिंग आज दोपहर 2 बजे मुख्य मामले की सुनवाई तक रोक दे। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह आज की सुनवाई के नतीजे का इंतजार करने के लिए सीबीआई को बताएं।

 

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