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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को चंद्रमा पर चंद्रयान 3 के टचडाउन पॉइंट को ‘शिव-शक्ति पॉइंट’ नाम दिया। इसके बाद से बीजेपी और कांग्रेस के बीच जबरदस्त जुबानी जंग छिड़ गई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने कहा कि यह नाम हास्यास्पद है क्योंकि पीएम मोदी को चंद्रमा की सतह का नाम रखने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “पूरी दुनिया हंसेगी। पीएम मोदी को चंद्रमा पर एक पॉइंट बताने का अधिकार किसने दिया। हम लैंड किए हैं, यह बहुत अच्छा है। हमें इस पर गर्व है, इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन हम चाँद या किसी पॉइंट के मालिक नहीं हैं।”
इस पर भाजपा ने ‘जवाहर पॉइंट’ को लेकर कांग्रेस नेता पर निशाना साधा। बता दें कि जवाहर पॉइंट वह नाम है जहां भारत का पहला चंद्र मिशन चंद्रयान-1 2008 में क्रैश हुआ था। भाजपा नेताओं का कहना है कि पीएम मोदी ने इस पॉइंट का नाम अपने नाम पर या अटल बिहारी वाजपेयी जैसे किसी भाजपा नेता के नाम पर नहीं रखा है। इस राशिद अल्वी ने कहा, “आप किसी भी चीज में जवाहरलाल नेहरू का मुकाबला नहीं कर सकते। इसरो जो कुछ भी है वह केवल जवाहरलाल नेहरू के कारण है। 1962 में, यह विक्रम साराभाई और पंडित जवाहरलाल नेहरू थे जिन्होंने इसरो की स्थापना की थी। तो आप कह सकते हैं कि पंडित नेहरू ने इन सभी की स्थापना की। यानी बिल्कुल अलग बात है। लेकिन अब मोदीजी इस बात का राजनीतिकरण कर रहे हैं।”
राशिद अल्वी के बयान पर भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया आई है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि कांग्रेस केवल अपने ‘हिंदू विरोधी’ चरित्र का खुलासा कर रही है। उन्होंने कहा, “यह वही पार्टी है जो भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाती है, राम मंदिर का विरोध करती है और हिंदुओं को गाली देती है। दोनों नाम – शिव-शक्ति पॉइंट और तिरंगा पॉइंट – देश से जुड़े हुए हैं। राशिद अल्वी को यह हास्यास्पद क्यों लगता है? और फिर नेता खुद को जनेऊधारी कहते हैं। कांग्रेस का सिद्धांत पहले परिवार है। वे केवल गांधी परिवार, जवाहरलाल नेहरू की प्रशंसा करेंगे। विक्रम लैंडर का नाम विक्रम साराभाई के नाम पर रखा गया है।” भाजपा नेता ने कहा, “अगर यह यूपीए होता, तो उन्होंने चंद्रयान 2 और 3 कभी नहीं भेजा होता और अगर उन्होंने ऐसा किया होता तो इसका नाम इंदिरा पॉइंट और राजीव पॉइंट रखा होता।”
जवाहर पॉइंट क्या है?
जवाहर पॉइंट को जवाहर स्थल के नाम से भी जाना जाता है। यह चंद्रमा पर शेकलटन क्रेटर के पास का क्षेत्र है जहां इसरो का मून इम्पैक्ट प्रोब क्रैश हो गया था। दरअसल भारत ने साल 2008 में अपना पहला चंद्र मिशन लॉन्च किया था। इसकी मदद से भारत ने पहली बार चांद पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। इसरो ने कंट्रोल्ड तरीके से इसकी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से टक्कर कराई। जगह चंद्रयान-1 का मून इम्पैक्ट प्रोब (MIP) टकराया था, उसे ‘जवाहर पॉइंट’ नाम दिया गया। यह जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन 14 नवंबर की तारीख से मेल खाता था और इसीलिए नाम जवाहर पॉइंट रखा गया था।
तिरंगा प्वाइंट क्या है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों से मिलने के लिए यूनान की राजधानी एथेंस से शनिवार को सीधे बेंगलुरु पहुंचे। उन्होंने घोषणा की कि चंद्रयान-3 लैंडर चंद्रमा की सतह पर जिस स्थान पर उतरा है, उसका नाम ‘शिव-शक्ति पॉइंट’ रखा जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने चंद्रयान-3 मिशन की सफलता को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास का ‘‘असाधारण क्षण’’ करार दिया और कहा कि चंद्रमा की सतह पर जिस स्थान पर चंद्रयान-2 ने 2019 में अपने पदचिह्न छोड़े थे, उसे ‘तिरंगा पॉइंट’ के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 मिशन के लैंडर के चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक उतरने की याद में भारत 23 अगस्त की तारीख ‘राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस’ के रूप में मनाएगा।
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