Home Life Style स्वाद का सफ़रनामा: कमल ककड़ी पाचन सिस्टम रखे दुरुस्त, हजारों वर्षों से भोजन में है शामिल, बेहद रोचक है इतिहास

स्वाद का सफ़रनामा: कमल ककड़ी पाचन सिस्टम रखे दुरुस्त, हजारों वर्षों से भोजन में है शामिल, बेहद रोचक है इतिहास

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स्वाद का सफ़रनामा: कमल ककड़ी पाचन सिस्टम रखे दुरुस्त, हजारों वर्षों से भोजन में है शामिल, बेहद रोचक है इतिहास

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हाइलाइट्स

भारत में कमल ककड़ी का भोजन के रूप में हजारों वर्षों से सेवन किया जा रहा है.
कमल ककड़ी में भरपूर फाइबर होता है, जो पाचन सिस्टम को दुरुस्त रखता है.
यह ब्रेन सिस्टम को सामान्य बनाए रखती है, इसलिए मूड पॉजिटिव रहता है.

Kamal Kakdi Benefits and History: कमल और कमल ककड़ी की जानकारी अधिकतर भारतीयों को है. हिंदू धर्म, संस्कृति और योग में कमल की कई विशेषताओं का वर्णन किया गया है और कई अवसरों पर इसे पूजा में भी शामिल किया जाता है. साथ ही कमल ककड़ी का भारतीय रसोई में विशेष महत्व है. इसे भोजन के अलावा, कई प्रकार के डिशेज में प्रयोग किया जाता है. कमल ककड़ी बेहद गुणकारी है. इसमें भरपूर फाइबर होता है, जो पाचन सिस्टम को दुरुस्त रखता है. यह ब्लड की क्वालिटी को भी दुरुस्त रखती है. भारत में हजारों वर्षों से आहार के रूप में इसका सेवन किया जा रहा है.

ककड़ी से संबंध नहीं, यह कमल की जड़ है

इस सब्जी का नाम कमल ककड़ी (Lotus Root) सिर्फ इसलिए है कि इसकी जड़ जैसी डंठल ककड़ी के समान लंबी होती है. असल में जिसे खाया जाता है, वह कमल की जड़ है. इसकी सब्जी काटकर बनाई जा सकती है. इसे पीस और तलकर कोफ्ते बनाकर भी ग्रेवी वाला शानदार डिश बनता है तो इसे बारीक काटकर चिप्स भी तली जा सकती है. इसकी लंबी जड़ों में स्टार जैसे बने होते हैं, जिसका स्वाद कुछ-कुछ अखरोट, नारियल व सिंघाड़े जैसा होता है. कुछ देशों में इस जड़ को नॉनवेज के साथ भी पका कर परोसा जाता है. चूंकि, कमल का फूल बारहमासी दिखाई देता है, इसलिए कमल ककड़ी भी हर सीजन में बिकती दिखाई देगी.

कमल ककड़ी की जड़ जैसी डंठल ककड़ी के समान लंबी होती है. Image-Canva

‘चरकसंहिता’ में विस्तार से किया गया है वर्णन

सीधी सी बात है कि जब कमल का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है तो कमल ककड़ी का इतिहास भी उतना ही प्राचीन होगा. अगर हम भारतीय संदर्भ में देखें तो हिंदू धर्म व संस्कृति में कमल का विशेष स्थान है. भारत के प्राचीन धर्मग्रंथों में कमल के गुणों का विशद वर्णन है. भारत के अनेकों प्राचीन मंदिरों में भी कमल को उकेरा गया है. यहां तक कि धन की देवी लक्ष्मी जी भी कमल के ऊपर विराजमान होती हैं. भगवान विष्णु व लक्ष्मी का पूजन कमल के साथ ही किया जाता है. देश के सामाजिक उत्सवों में भी कमल दिखाई देता है तो योग में जिस पद्मासन की बात करते हैं, उसे कमल आसन भी कहा जाता है. योग में कुंडलिनी जागृत करने के दौरान कमल के समान ही दिखाई और आभासित होती है.

ग्रंथ के अनुसार, यह रूखी होती है, पेट को साफ रखती है और शीतल भी है. Image-Canva

जब कमल इतना महत्वपूर्ण है तो कमल ककड़ी भी वैसी ही होगी. भारत में कमल ककड़ी का भोजन के रूप में हजारों वर्षों से सेवन किया जा रहा है. ईसा पूर्व सातवीं-आठवीं शताब्दी में लिखे गए आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में कमल, कमलदंडिका, पत्ते, बीज की विशेषताओं का विस्तार से वर्णन है. ग्रंथ के अनुसार, यह रूखी होती है, पेट को साफ रखती है और शीतल भी है. वैसे, कमल को एशिया मूल का माना जाता है और मुख्य रूप से यह भारत के अलावा चीन, जापान, इंडोनेशिया और फिलीपींस में उगाया जाता है. एशिया के बाहर प्राचीन मिस्र की सभ्यता में कमल का वर्णन है. वैसे इसका भोजन के अलावा औषधीय कार्यों में भी उपयोग होता है.

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मिनरल्स और विटामिन से भरपूर है कमल ककड़ी

भोजन के रूप में कमल ककड़ी की बात करें तो यह गुणों से भरपूर है. इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा होती है. यह आहार फाइबर पेट के मल से जुड़कर उसे आसानी से बाहर निकाल देता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि इसके सेवन से डायरिया और कब्ज जैसी बीमारियां नहीं होंगी. फूड शेफ व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार, कमल ककड़ी में कैल्शियम, कॉपर, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम और जिंक भी पाया जाता है. इसमें विटामिन सी भी मौजूद होता है. यह सभी तत्व एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, इसलिए यह हार्ट को सुचारू बनाए रखते हैं, साथ ही ब्लड को भी साफ रखते हैं. इसका सेवन ब्लड में रेड सेल्स को बढ़ाता है. इसमें पोटैशियम भी पाया जाता है, जो रक्त वाहिकाओं की कठोरता और संकुचन को कम करके रक्त प्रवाह को बढ़ाता है.

खाएंगे तो मूड रहेगा पॉजिटिव

कमल ककड़ी में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स पाया जाता है. यह ब्रेन सिस्टम को सामान्य बनाए रखता है, इसलिए मूड पॉजिटिव रहता है. मानसिक सेहत भी दुरुस्त रहती है. इसका परिणाम यह होता है कि सिरदर्द, तनाव के स्तर और चिड़चिड़ापन जैसे अन्य विकारों में कमी आ जाती है. इसका सेवन बलगम से भी बचाए रखता है, जिसके चलते श्वसन सिस्टम भी सामान्य बना रहता है. इसमें विटामिन ए भी पाया जाता है, जिससे स्किन, बाल व आंखें स्वस्थ बनी रहती हैं. कमल ककड़ी फंगल इन्फेक्शन को भी रोकती है. सामान्य मात्रा में कमल ककड़ी के सेवन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है, लेकिन ज्यादा सेवन करने से पेट में अफारा (गैस जैसी मनस्थिति) बन जाता है. इसे कच्चा खाने से बचना चाहिए, क्योंकि इसमें परजीवी होते हैं, जो शरीर के लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं.

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