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हाइलाइट्स
सिरदर्द, माइग्रेन में रोज़मेरी ऑयल लाभकारी होता है.
रोज़मेरी को माउथ फ्रेशनर के तौर पर भी उपयोग करते हैं.
Swad Ka Safarnama: रोज़मेरी एक खास तरह का खुशबूदार पौधा है, जो ब्रीथिंग (श्वसन संबंधी परेशानी) को सुचारू बनाए रखता है. इसके पत्ते और फूल देखने में काफी सुंदर होते हैं और भोजन में इनका उपयोग बढ़ने लगा है. इसका सेवन याददाश्त को भी बढ़ाए रखने में मदद करता है. यह विदेशी पौधा हिमालयी क्षेत्रों में भी उगता है और अब यह पूरे देश में आसानी से मिल जाता है.
कई डिशेज में होता है रोज़मेरी के पत्तों का उपयोग
रोज़मेरी (Rosemary) पुदीना परिवार का छोटा सदाबहार पौधा है, जिसकी पत्तियों का उपयोग भोजन को स्वादिष्ट व खुशबूदार बनाने के लिए किया जाता है. इसकी विशेषता है कि भोजन में ताजी पत्तियां डाल दो या सूखी पत्तियों को मसलकर भुरक दो, स्वाद व सुगंध बढ़ा देगा. इसकी पत्तियों का स्वाद थोड़ा तीखा और हलका सा कड़वा होता है. सलाद को सजाने के लिए लगा दो, या मसाले के साथ पीस दो. भोजन में अलग ही रंगत ले आएगा. यूरोपियन देशों में तो इसका चलन खूब है. वहां मटन, चिकन, फिश में इसकी स्टफिंग की जाती है. इनको ग्रिल करते वक्त, टमाटर, शलजम, आलू व अन्य सब्जियों में पत्तियों को भरकर भूना जाता है, उसके बाद उभरा स्वाद दिल-दिमाग व जुबान में अलग ही रंगत भर देता. सूप, सॉसेज में भी इन पत्तियों का खूब उपयोग होता है.
रोज़मेरी अधिकांश कीटों और पौधों की बीमारियों के प्रति काफी प्रतिरोधी है. Image-Canva
इसकी पत्तियां चमकदार हरी होती हैं और फूल हल्का नीला रंग लिए होते हैं. यूरोपियन साहित्य और लोककथाओं में भी रोज़मेरी का वर्णन आता है और इसे स्मरण और निष्ठा का प्रतीक माना गया है. अगर आप दिल्ली की खान मार्केट या आईएनए मार्केट में जाएंगे तो वहां रोज़मेरी की पत्तियां आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी. वैसे खाद्य पदार्थ बेचने वाली ऑनलाइन कंपनियां इसे आप घर तक सहजता से पहुंचा सकती हैं. आम लोगों के लिए इसका सेवन अनोखा ही होगा.
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प्राचीन लोकचिकित्सा में बेहद कारगर बताया गया है
रोज़मेरी का इतिहास प्रकृति जितना ही पुराना है. विशेष क्षेत्रों में यह अपने आप उग जाती है. अब तो इसकी खूब बागवानी की जा रही है. अमेरिका स्थित नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (NLM) की एक रिपोर्ट के अनुसार रोज़मेरी की उत्पत्ति हजारों वर्ष पहले भूमध्य सागर और उप-हिमालयी क्षेत्रों में हुई है और लोकचिकित्सा में इसका उपयोग सिरदर्द, माइग्रेन, अनिद्रा, भावनात्मक परेशानी और अवसाद को ठीक करने के लिए किया जा रहा है. मेडिसिन के अनुसार विभिन्न रिसर्च बताती हैं कि रोज़मेरी महत्वपूर्ण रोगाणुरोधी, एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-एपोप्टोटिक (संक्रमणनाशक प्रोटीन), एंटी-ट्यूमरजेनिक (ट्यूमररोधी), एंटीनोसाइसेप्टिव (कैंसररोधी) और न्यूरोप्रोटेक्टिव (कोशिकाओं का क्षरण रोकना) गुण होते हैं. विश्वकोश ब्रिटानिका (Britannica) का कहना है कि रोज़मेरी की पत्तियों का उपयोग खाद्य पदार्थों को स्वादिष्ट बनाने के लिए किया जाता है.
यह भूमध्यसागरीय क्षेत्र की मूल निवासी है. रोज़मेरी अधिकांश कीटों और पौधों की बीमारियों के प्रति काफी प्रतिरोधी है. मसाला प्रोद्योगिकी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाने वाले व भारत की एग्मार्क लेब के संस्थापक निदेशक जीवन सिंह प्रुथी ने अपनी पुस्तक ‘Spcices And Condiments’ में भी रोज़मेरी के बारे में डिटेल जानकारी दी है. उनका कहना है कि मूलरूप से यह दक्षिणी यूरोप का पौधा है और भूमध्यसागर के आसपास के सूखे पहाड़ी इलाकों में भी यह खूब उगता है. इसके अलावा हिमालय व नीलगिरी के शीतोष्ण इलाकों में भी यह उग जाता है.
इसके फूलों का शहद गुणकारी माना गया है
लेखक का कहना है कि रोज़मेरी एक अत्यंत कीमती व अनुपम पत्तेदार मसाला है. चूंकि इसके पत्ते खुशबूदार होते हैं, इसलिए भारत में इसे ठंडे स्थानों में बगीचों में उगाया जाता है. रोज़मेरी की झाड़ को यूगोस्लाविया, स्पेन, पुर्तगाल और यूरोप के अन्य देशों के अलावा अमेरिका में भी उगाया जाता है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इस पौधे के नरम, ऊपर के पत्ते भोजन को सजाने के अलावा पेय पदार्थों, अचार, सूप व अन्य प्रकार के भोजन को स्वादिष्ट बनाने के काममें लाए जाते हैं. इसके पत्तों व फूलों से निकला तेल इत्र व दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है. रोज़मेरी को भारत में इंपोर्ट भी किया जाता है. पत्तों को उत्तेजक व क्षुधावर्धक माना जाता है. दमे की परेशानी में इसके सूखे पत्तों का धुआं लेने से लाभ होता है. मधुमक्खियां इसके फूलों पर बहुत आकर्षित रहती हैं, इसके फूलों से बना शहद बेहद पौष्टिक व स्वादिष्ट माना जाता है.
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याददाश्त बढ़ाने में बेहद कारगर है रोज़मेरी
हर्ब सोसायटी ऑफ अमेरिका (HSOA) के अनुसार रोज़मेरी का उपयोग प्राचीन यूनानियों और रोमनों के समय से किया जा रहा है. यूनानी विद्वान परीक्षाओं के दौरान अपनी याददाश्त बढ़ाने के लिए अपने सिर पर इसके पत्तों की माला पहनते थे. नेपोलियन बोनापार्ट ने जिस ईओ डी कोलोन का इस्तेमाल किया था, वह रोज़मेरी से बनाया गया था. शेक्सपियर के पांच नाटकों में इसका उल्लेख किया गया था. प्राचीन समय में दुल्हनें अक्सर अपनी शादियों में रोज़मेरी की मालाएं पहनती हैं क्योंकि यह खुशी, वफादारी और प्यार का प्रतीक भी है.
रोज़मेरी ऑयल में एंटी-एजिंग गुण होते हैं और यह स्किन को चमकदार बनाने में प्रभावी है. Image-Canva
दूसरी ओर फूड एक्सपर्ट व न्यूट्रिशयन नीलांजना सिंह का कहना है कि रोज़मेरी की गंध की सबसे बड़ी विशेषता है कि यह ब्रीथिंग को सुचारू बनाए रखती है. रोज़मेरी को एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण माउथ फ्रेशनर के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है. यह मूड को भी पॉजिटिव बनाए रखती है और चिंता व तनाव को कम करती है.
सिरदर्द, माइग्रेन में उपयोगी है इसका तेल
सिंह के अनुसार इंटरनेशनल जर्नल ऑफ न्यूरोसाइंस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार रोज़मेरी ने याददाश्त की गुणवत्ता के गुण मौजूद हैं. इसके तेल का उपयोग अल्जाइमर रोग को रोकने में मददगार है. इसमें प्रभावी एंटीसेप्टिक गुण हैं. यह बैक्टीरिया संक्रमण के खिलाफ भी काम करती है. रोज़मेरी एक उत्तेजक के रूप में कार्य करती है और शरीर में ब्लड के रेड सेल्स को बढ़ाती है. यह बॉडी में समुचित ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करती है. अगर सिर में दर्द है, या माइग्रेन की समस्या है तो इसका तेल कारगर है. इसमें एंटी-एजिंग गुण होते हैं और यह स्किन को चमकदार बनाने में प्रभावी है. रोज़मेरी के पत्तों को अगर ज्यादा उपयोग में लाया जाएगा एलर्जी तो पैदा करेंगे ही साथ ही भोजन और मुंह का स्वाद भी बिगाड़ देंगे.
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FIRST PUBLISHED : August 02, 2023, 07:00 IST
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