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हाइलाइट्स
व्रत के दौरान साबूदाना का फलाहार के तौर पर काफी उपयोग किया जाता है.
साबूदाना खाने से काफी देर तक भूख का एहसास नहीं होता है.
Swad Ka Safarnama: भारतीय आहार में साबूदाने का विशेष महत्व है. खाते ही यह शरीर में तुरंत एनर्जी का संचार कर देता है. भारत की धार्मिक विविधता ने भी साबूदाने को अलग मुकाम दिया है, क्योंकि व्रत-उपवास में इसकी पूछ बढ़ जाती है. इसकी एक अन्य विशेषता है कि इसके नमकीन व मीठे दोनों प्रकार के व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं.
कई व्यंजन किए जाते हैं तैयार
साबूदाना (Sago/ Tapioca) खूबसूरत व छोटी गोलियों का भोजन है, जिसमें जरा सा पानी छिड़क दिया जाए तो यह पकने के लिए तैयार हो जाता है. इसके अनेक नमकीन व मीठे व्यंजन बनाए जा सकते हैं. इसमें आलू व विभिन्न सब्जियों को डालकर सूखी खिचड़ी बनाई जा सकती है, कई राज्यों में तो इसका वड़ा खूब खाया जाता है. इसमें मूंगफली व कटे छोटे आलू डालकर शानदार नाश्ता बनाकर खाया जा सकता है. इसके कुरकुरे पापड़ बहुत मशहूर हैं तो इसमें चीनी/गुड़ के अलावा ड्राई फ्रूट्स डालकर शानदार मिष्ठान्न या हलवा भी बनाया जाता है. साबूदाने का कोई भी व्यंजन खा लीजिए, भरपूर संतुष्टि मिलेगी.
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विशेष कंद से बनाया जाता है साबूदाना
सवाल यह है कि आखिर छोटे मोती जैसा दिखने वाला साबूदाना बनता कैसे है? असल में यह जमीन में उगने वाले कंद (शकरकंदी के समान लेकिन फीका) जिसे कसावा व अन्य नाम से भी जाना जाता है, उसको पीस व लसलसा आटा जैसा बनाकर मशीन द्वारा बनाई गई छोटी गोलियां हैं. इसका आटा भी बाजार में मिलता है, लेकिन साबूदाने की बात अलग है. फूड हिस्टोरियन इसे अफ्रीकन देशों का भोजन मानते हैं, जबकि कुछ हिस्टोरियन का कहना है कि यह हजारों वर्ष पहले इंडोनेशिया द्वीपसमूह में पैदा हुआ और वहां से पूरी दुनिया में फैला.
साबूदाना हड्डियों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. Image-Canva
विश्वकोष ब्रिटानिका (Britannica) भी इसे इंडोनेशिया क्षेत्र का मानता है. उसके अनुसार इसके स्टार्च का उपयोग सूप, केक, पुडिंग के लिए भी किया जाता है. चीन में इसे बेहद उपयोगी माना जाता है. भारत में साबूदाना बनाने वाला कंद सबसे पहले वर्ष 1940 के दशक में दक्षिण भारत में उगाया गया और जल्द ही इसने पूरे भारत में जलवे दिखाने शुरू कर दिए.
कैलोरी व कार्बोहाइड्रेट का खजाना है
व्रत-उपवास में साबूदाने का महत्व इसलिए बढ़ जाता है, क्योंकि कई घंटे तक भूखे रहने के बाद जब इसे खाया जाता है तो यह शरीर को तुरंत एनर्जी प्रदान करता है. उसका कारण यह है कि इसमें प्रचुर मात्रा में कैलोरी व कार्बोहाइड्रेट होता है, जो तुरंत शरीर में ऊर्जा पैदा कर देते हैं. फूड एक्सपर्ट व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार 100 ग्राम साबूदाने में करीब 358 कैलोरी और 88 ग्राम कार्बोहाइड्रेट मौजूद होता है.
अगर इसे लगातार खाएं तो यह बहुत जल्द वजन बढ़ा सकता है. यह पेट को भरा-भरा सा होने का भी अहसास कराता है. शारीरिक मेहनत करने वालों के लिए भी साबूदाना बेहद उपयोगी माना जाता है. इसे हड्डियों के लिए भी लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इसमें कैल्शियम की मात्रा भी समुचित होती है.
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पाचन सिस्टम को स्मूद बनाए रखता है
ऐसा भी माना जाता है कि इसका सेवन ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है. चूंकि यह बहुत जल्द पच जाता है, इसलिए पाचन सिस्टम को स्मूद बनाए रखने में लाभकारी है. इसका नियमित सेवन शरीर को एनीमिक होने से भी बचाए रखता है. यह दिमाग को भी कूल बनाए रखता है. इसकी बनाई खीर भी बेहद स्वादिष्ट व शरीर को पोषण प्रदान करती है. इसकी खिचड़ी तो पूरी दुनिया में खाई जाती है. कुछ देशों में तो इसकी मिठाई भी बनाई जाती है. सामान्य तौर पर साबूदाने के सेवन का कोई साइड इफेक्ट नहीं है, लेकिन अधिक मात्रा में खाने पर यह कब्ज पैदा कर सकता है. इसका अधिक सेवन वजन भी बढ़ा सकता है.
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Tags: Food, Food Recipe, Lifestyle
FIRST PUBLISHED : September 13, 2023, 07:00 IST
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