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Mukhtar Ansari Family: मुख्तार अंसारी को आज दुनिया बांदा जेल में बंद ऐसे बदनाम शख्स के तौर पर जानती है जिसने बड़े-बड़े गुनाह किए हैं और उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। लेकिन यह भी एक सच है कि उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े माफियाओं में शुमार ये शख्स एक ऊंचे खानदान से ताल्लुक रखता है। मुख्तार के दादा आजादी से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे तो नाना महावीर चक्र विजेता। यही नहीं उसके चाचा भारत के उप राष्ट्रपति रहे। लेकिन इन सबसे अलग मुख्तार ने खुद के लिए जरायम की दुनिया चुनी। पिछले करीब चार दशकों में वह एक के बाद गुनाह करता गया और आखिरकार खुद पर 50 से अधिक मुकदमे और आजीवन कारावास तक की सजा मुकर्रर करा ली। सोमवार को ही वाराणसी की एमपी-एमएलए कोर्ट ने मुख्तार को 32 साल पुराने अवधेश राय मर्डर केस में उम्रकैद की सजा सुनाई है।
अब लगभग यह तय हो चुका है कि मुख्तार की बाकी बची पूरी उम्र सलाखों के पीछे ही कटनी है। मुख्तार की कहानी पर कोई गौर करे तो उसे यहां अजीबोगरीब स्थितियां देखने को मिलेंगी। पारिवारिक पृष्ठभूमि देखकर यह यकीन करना मुश्किल हो जाएगा कि मुख्तार पर इतने संगीन इल्जाम लगते रहे हैं। मुख्तार के दादा डॉ.मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। वह 1926-27 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। उन्हें गांधीजी का बेहद करीबी माना जाता था। मुख्तार के दादा की तरह उनके नाना भी देा की नामचीन हस्तियों में शामिल हैं। महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर उस्मान मुख्तार अंसारी के नाना थे। ब्रिगेडियर उस्मान को नवशेरा का शेर कहा जाता है। उन्होंने 1947 की जंग में नवशेरा की लड़ाई में भारत को जीत दिलाई। इस जंग में वह शहीद हो गए थे।
यही नहीं देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी मुख्तार अंसारी के चाचा लगते हैं। इन्हीं वजहों से कई लोग मुख्तार के अपराध की दुनिया जुड़ने पर अफसोस जाहिर करते हैं। लोगों का कहना है कि किसी जमाने मुख्तार के परिवार का सम्मान उनके काम की वजह से था। उसके खानदान का गौरवशाली इतिहास रहा लेकिन मुख्तार की बदनामी ने उसके पूर्वजों की नेकनामी से लोगों का ध्यान हटा दिया। मुख्तार, पांच बार यूपी की मऊ सीट से विधायक रहा। जाहिर है क्षेत्रीय जनता ने अंसारी परिवार का हमेशा साथ दिया लेकिन मुख्तार की दिलचस्पी सियासत से ज्यादा अपराध में रही। दबंगई जाने कब अपराधिक वारदातों में बदल गई। हत्या, किडनैपिंग, रंगदारी जैसे मामले एक-एक कर दर्ज होते चले गए। देखते ही देखते पूरे पूर्वांचल में मुख्तार गैंग की दहशत फैल गई। सियासत में दखल और जरायम की दुनिया में दबदबे के बूते मुख्तार का जलवा ऐसा था कि एक दौर में उस पर एक्शन लेने के लिए डिप्टी एसपी तक को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ गई थी।
मुख्तार जेल में रहकर भी चुनाव जीतता रहा। वहीं से अपना गैंग चलाता रहा। 2005 में उस पर मऊ में हिंसा भड़काने का आरोप लगा। यही नहीं बीजेपी नेता कृष्णानंद राय और उनके सात साथियों की हत्या में भी उसी का नाम आया। कहा गया कि कृष्णानंद राय की हत्या मुख्तार के इशारे पर उसके गुर्गे मुन्ना बजरंगी ने की थी। कुछ समय पहले मुन्ना बजरंगी की जेल में हत्या हो गई थी। मुख्तार 2005 में अपनी जमानत तुड़वाकर जेल गया था। तबसे वह वहीं पर है। इस दौरान उसे पहले गाजीपुर जेल में रखा गया। फिर मथुरा जेल भेजा गया। वहां से आगरा और आगरा से बांदा। बीच में वह किसी बहाने से पंजाब की जेल में रहा। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार बनने के बाद मुख्तार को पंजाब से यूपी लाया गया। तबसे वह बांदा जेल में बंद है।
बताया जाता है कि मुख्तार अंसारी गिरोह का पूर्वांचल में रेलवे ठेकेदारी, स्क्रैप, खनन, शराब जैसे तमाम धंधों पर कब्जा है। योगी सरकार बनने के बाद से गिरोह के आर्थिक साम्राज्य पर शिकंजा कसा है। सरकार, मुख्तार की करीब 448 करोड़ जब्त कर चुकी है। इसमें मुख्तार के अलावा उसकी पत्नी अफशा अंसारी, बेटे अब्बास अंसारी और भाइयों और करीबियों की भी संपत्ति है। मुख्तार पर कार्रवाई को लेकर बीजेपी प्रदेश की कानून व्यवस्था की मजबूती का दावा करती है।
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