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ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन यानी AIFF से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एआईएफएफ ने अपने महासचिव डॉ. शाजी प्रभाकरन को तत्काल प्रभाव से टर्मिनेट करने का फैसला किया है। एआईएफएफ का दावा है कि फेडरेशन के साथ उन्होंने विश्वासघात किया, जिसके चलते उनसे पद छीन लिया गया। फेडरेशन ने महासचिव पद की जिम्मेदारी मौजूदा उप सचिव को सौंप दी है। इंडियन फुटबॉल टीम्स के आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस बात की जानकारी दी गई है।
एआईएफएफ ने एक्स पर लिखा है, “अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ ने घोषणा की है कि डॉ. शाजी प्रभाकरन की सेवाएं 7 नवंबर, 2023 से तत्काल प्रभाव से विश्वासघात (ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) के कारण समाप्त कर दी गई हैं। एआईएफएफ के उप सचिव एम सत्यनारायण, तत्काल प्रभाव से एआईएफएफ के कार्यवाहक महासचिव के रूप में कार्यभार संभालेंगे।” महासंघ का ये फैसला बहुत कुछ दर्शाता है। एक बड़ी संस्था में विश्वासघात करने वालों के लिए जगह नहीं है।
शाजी प्रभाकरन को पिछले साल सितंबर में ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन का महासचिव चुना गया था। वे दिल्ली फुटबॉल के अध्यक्ष थे और लंबे समय से खेल प्रशासक रहे। एआईएफएफ की नई कार्यकारी समिति ने उनकी नियुक्ति की थी। उसी समय कल्याण चौबे ने एआईएफएफ अध्यक्ष का पद हासिल किया था। उन्होंने फेडरेशन के चुनाव में पूर्व खिलाड़ी बाईचुंग भूटिया को 33-1 से हराया था।
कल्याण चौबे ने ही महासचिव पद के लिये प्रभाकरन के नाम की अनुशंसा की थी। उनके इस अनुशंसा को बाकी सदस्यों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया था। शाजी प्रभाकरन ने हमेशा एआईएफएफ में बदलाव की मांग की थी। ऐसा पहली बार था जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार छह पूर्व दिग्गज खिलाड़ी समिति का हिस्सा थे।
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