Home Life Style #HumanStory: एसिड अटैक सर्वाइवर जिनकी चमकीली मुस्कुान से आज रैंप जगमगाता है मगर….

#HumanStory: एसिड अटैक सर्वाइवर जिनकी चमकीली मुस्कुान से आज रैंप जगमगाता है मगर….

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#HumanStory: एसिड अटैक सर्वाइवर जिनकी चमकीली मुस्कुान से आज रैंप जगमगाता है मगर….

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25 साल की अनमोल जब रैंप पर चलती हैं और अपनी मुस्कान बिखेरती हैं तब मानो स्टेज भी अपने होने पर मुस्कुरा देता हो! हालांकि अनमोल बताती हैं कि जब वह बस-ट्रेन में बैठती हैं तो लोग दूर हट जाते हैं जैसे उन्हें कोई फैलने वाली बीमारी हो. लेकिन अनमोल कुछ कहती नहीं, बस अपनी खूबसूरत मुस्कान बिखेर देती हैं. आप सोचेंगे कि ऐसा क्यों है कि रैंप पर कैटवॉक करने वाली एक मॉडल को देखकर लोग सकुचाने लगते हैं..  हां, आपका हैरान होना, सिर खुजाना लाजिमी है. दरअसल अनमोल एसिड अटैक सर्वाइवर हैं.

एसिड अटैक की शिकार हुईं अनमोल अपने ही पिता के हाथों एसिड की शिकार हुईं. वह महज 2 महीने की थीं जब उनके पिता ने मां पर एसिड डाल दिया था. वह तब मां की गोद में सो रही थीं. पापा अचानक घर के भीतर घुसे और मां पर एसिड की बोतल डाल दी. अनमोल की मां पर जो एसिड गिरा, वह उन पर गिरता चला गया और उन्हें झुलसाता चला गया. ऐसी हालत में मां और बेटी को उनके पड़ोसियों ने ही हॉस्पिटल पर पहुंचाया. मां इस इलाज के दौरान जीवित नहीं बच पाईं. लेकिन अनमोल बच गईं. अनमोल बताती हैं कि लंबे समय तक अस्पताल उनका घर बना रहा और नर्सें जैसे उनकी मांएं बनी रहीं. वह इतनी छोटी थीं कि उस वक्त का उन्हें कुछ भी याद नहीं.

हॉस्पिटल में नर्सों के बीच गुजारा जीवन

अनमोल के जीवन के ये शुरुआती साल ऐसी जगह पर गुजरे जहां लोग आना भी पसंद नहीं करते. फिनाइल की बदबू और खून व जख्म देखकर लोगों को जहां आने से परेशानी होती है वहां वह अपने शिशु-जीवन को गुजार रही थीं. बड़ी हो रही थीं. अनमोल ने पांच साल वहां गुजारे. बाद में उन्हें अनाथालय भेज दिया गया. अनाथालय में वह बाकी बच्चों के बीच हंसती खेलती बोलती बड़ी हुईं. हर त्योहार में बाकी बच्चों की तरह तैयार होती और सजती संवरती. बस एक फर्क किया गया- उन्हें स्टेज पर जाने की परमिशन नहीं थी…

अनमोल को डांस करना, अच्छे-अच्छे पोज बनाना बहुत ही अच्छा लगता था. लेकिन वह फिर भी स्टेज पर नहीं जा सकती थीं. वह कहती हैं कि सालों बाद उन्हें इस बात की वजह पता चली. वे इसलिए उन्हें नहीं बताते थे कि कहीं वह खुद को दूसरों से अलग जानने लगेंगी तो सहना मुश्किल होगा. अनमोल कहती हैं कि जब वह कॉलेज गईं तब उन्हें यह ‘पता चला’ कि वह ‘अगली’ (बदसूरत) हैं. न कोई दोस्ती के लिए तैयार था न ही कंफर्टेबल होता. कारण यही कि वह सबसे अलग दिखतीं. वह कॉलेज में कोने में बैठकर अकेले ही लंच करतीं और कॉलेज की क्लास में सबसे आखिरी बेंच पर अकेले ही बैठा करतीं. वह कहती हैं कि मैं खुद को ज्यादा से ज्यादा इनविजिबल रखने की कोशिश करतीं. काफी चुपके से दबे पांव क्लास में घुसतीं और लेक्चर के दौरान टीचर से कोई सवाल नहीं करती थीं जिसका नतीजा यह भी हुआ कि पढ़ाई में पिछड़ने लगीं. इसके बाद कॉलेज जाना उन्होंने बंद कर दिया और अंतत: वह फेल हो गई थीं.

सहकर्मियों ने कहा- शक्ल की वजह से काम पर फोकस नहीं कर पाते

मगर, अनाथालय में सभी की हौसलाअफजाई के बाद उन्होंने दोबारा पढ़ाई की और नौकरी शुरू की लेकिन फिर अचानक अनाथालय के लोगों ने उन्हें काम पर जाने से रोक दिया. उन्हें शायद यह कहा गया कि उनकी वजह से ऑफिस के लोग काम पर फोकस नहीं कर पाते हैं…उनकी शक्ल को लेकर कंपी के एचआर से एंप्लॉइज ने शिकायत की थी… परेशानी के दिनों में बस उन्होंने एक दिन फेसबुक पर पहली बार अपनी फोटो डाली पहले फूल या फेक तस्वीर लगाती थीं. तब पहली बार अपनी खुद की तस्वीर लगाई और सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने लगीं. रात में फोटो डाली सुबह लोगों ने ढेरों कमेंट्स के जरिए हौसलाअफजाई की हुई थी. इसी बीच एक दिन एक यूनिवर्सिटी से एक प्रोजेक्ट के लिए मॉडलिंग का ऑफर आया.

यह उनकी लिए जबरदस्त खबर थी क्योंकि जहां उनकी शक्ल की वजह से लोग उन्हें नौकरी पर भी नहीं रख रहे थे वहां वह अब रैंप पर चलने वाली थीं. धीरे-धीरे उन्हें और ऑफर आने लगे. अब अनमोल सुपर मॉडल्स के बीच रैंप वॉक करती हैं. हालांकि वह यह भी बताती हैं कि फैशन इंडस्ट्री में लोग खुद को नेकनीयत दिखाने के लिए कई बार रैंप पर एसिड अटैक सर्वाइवर या भारी शरीर वाली औरतों को ले लेते हैं. पेमेंट की बात चले तो कहते हैं- तुम्हें इतने बड़े लोगों के बीच चलने का मौका मिला यह ही बड़ी बात है. मगर अनमोल कहती हैं कि ऐसी बातें उन्हें दुख जरूर दें लेकिन वह इस दुख को झाड़कर चलना नहीं छोड़तीं और बस चलती चली जा रही हैं. जिन्दगी की टेढ़ी मेढ़ी रैंप पर उन्होंने शायद अब चलना सीख लिया है…

न्यूज18 हिन्दी पर यह स्टोरी 13 जनवरी 2020 को पहली बार पब्लिश हुई थी. हम आज फिर से आपके लिए पेश कर रहे हैं. 

Tags: Acid attack, Crime against women, Women Empowerment

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