[ad_1]
चीन के राष्ट्रपति ने सऊदी प्रिंंस को साधा
सऊदी अरब और ईरान के बीच दोस्ती को खाड़ी देशों में चीन के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक माना जा रहा है। इससे पहले मार्च महीने में जिनपिंग ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ कई मुद्दों पर फोन पर बात की थी। पिछले महीने ही दोनों देशों के बीच रिश्तों में फिर से शुरुआत का ऐलान किया गया था। विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब और ईरान के बीच में डील कराने से चीन का खाड़ी देशों में प्रभाव बहुत बढ़ गया है जहां अब तक दशकों से अमेरिका ही मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है।
सऊदी अरब ने साल 2016 में ईरान के साथ उस समय सारे रिश्ते तोड़ लिए थे जब उसके तेहरान स्थित दूतावास पर भीड़ ने हमला कर दिया था। ये लोग शिया धर्म गुरु को सऊदी अरब में फांसी दिए जाने से भड़के हुए थे। सऊदी अरब ने ईरान के राजनयिकों को आदेश दिया था कि वे मात्र 48 घंटे के अंदर ही देश को छोड़ दें। यही नहीं सऊदी अरब ने भी तत्काल अपने दूतावास के सभी लोगों को निकाल लिया था।
ईरान और सऊदी में यमन को लेकर विवाद
दोनों के बीच खराब रिश्तों की शुरुआत एक साल पहले ही हो गई थी जब सऊदी अरब और यूएई ने यमन की जंग में हस्तक्षेप किया था। यमन में ईरान समर्थक हूती विद्रोही सऊदी समर्थित सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते थे। हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी साना पर कब्जा कर लिया था। सऊदी को उम्मीद है कि ईरान के साथ डील से उसकी सुरक्षा मजबूत होगी जो हूती विद्रोहियों को हथियार और ड्रोन देता है। हूती विद्रोही अक्सर सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमला करते रहे हैं। इससे सऊदी को भारी नुकसान हुआ है।
[ad_2]
Source link