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ईशा बिरोरिया/ ऋषिकेश. सनातन धर्म में सावन माह का विशेष महत्व है, हिंदू धर्म में सावन पूर्णिमा काफी महत्वपूर्ण पूर्णिमा मानी गई है. इस विशेष दिन पर रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाता है. सावन पूर्णिमा को श्रावणी पूर्णिमा के रूप में भी मनाया जाता है. ये पूर्णिमा स्नान, दान और शिव पूजा के लिए श्रेष्ठ मानी गई है. इस विशेष दिन पर पवित्र नदियों में स्नान और गरीबों को दान करने का विशेष महत्व है.
पुजारी शुभम तिवारी बताते हैं कि सावन पूर्णिमा को श्रावणी पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस विशेष दिन पर चंद्र भगवान को अर्घ्य देने का, सत्यनारायण की कथा सुनने का और शिव सहित मां लक्ष्मी और नारायण की पूजा का भी विशेष महत्व है. वे बताते हैं कि जो कोई भी शिव भक्त इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं और रात में सत्यनारायण की कथा सुनते हैं, उनके जीवन में कभी भी धन का अभाव नहीं रहता. इस दिन चंद्र भगवान को अर्घ्य देने का भी विधान है. यह दिन बेहद खास इसलिए भी है क्योंकि इस दिन सभी बहनें अपने भाइयों की कलाई में राखी बांधती हैं.
30 अगस्त को रखा जाएगा व्रत
पुजारी शुभम बताते हैं कि इस वर्ष सावन पूर्णिमा 2 दिन 30 अगस्त और 31 अगस्त को पड़ रही है. पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा का व्रत 30 अगस्त को रखा जाएगा, जो भी सुहागिन महिला इस दिन व्रत रखती है, उसके घर में सुख समृद्धि बनी रहती है और घर से सभी नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं. वहीं इस दिन भगवान शिव, मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्र भगवान की पूजा करना बेहद शुभ माना गया है.
अगर आप ऋषिकेश घूमने आए हुए हैं या फिर आने की सोच रहें हैं तो इस विशेष दिन पर भगवान विष्णु, भगवान शिव और मां लक्ष्मी के मंदिरों के दर्शन कर उनकी उपासना जरूर करें. साथ ही पवित्र त्रिवेणी संगम में स्नान करना ना भूलें.
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FIRST PUBLISHED : August 22, 2023, 12:48 IST
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