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उमर मीडिया ने एक बयान जारी करके कहा कि पाकिस्तानी सेना के रॉ का एजेंट बताए जाने को खारिज कर दिया। टीटीपी ने कहा कि अगर उसे भारत का समर्थन हासिल होता तो पाकिस्तानी सेना अफगानिस्तान के तालिबान के शासकों से उनकी जमीन पर टीटीपी के अड्डों के बारे में क्यों बात करती। टीटीपी ने पाकिस्तानी सेना की क्षमता पर भी सवाल उठाया। उसने कहा कि पाकिस्तानी सेना भारत से कश्मीर की एक इंच जमीन भी आजाद नहीं करा सकी।
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तहरीक-ए-तालिबान ने कहा कि पाकिस्तानी सेना केवल अपनी जनता का दमन करना जानती है। टीटीपी ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान के आर्थिक संकट और देश में राजनीतिक अराजकता के लिए सेना जिम्मेदार है। इस बीच तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे अफगानिस्तान की सरकार के साथ राजनयिक संबंध बनाएं। उसने दुनिया से तालिबान से बातचीत की अपील की। टीटीपी आतंकी लगातार पाकिस्तानी सेना हमले कर रहे हैं।
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पिछले दिनों पेशावर की मस्जिद पर किए गए भीषण हमले में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी मारे गए थे। पाकिस्तान सरकार लगातार तालिबान से गिड़गिड़ा रही है कि वह टीटीपी के खिलाफ कार्रवाई करे। तालिबान पाकिस्तान के इस अनुरोध को खारिज कर चुका है। तालिबान ने कहा है कि उसकी जमीन पर टीटीपी आतंकी सक्रिय नहीं हैं। टीटीपी आतंकी पाकिस्तान की वर्तमान सरकार को गैर इस्लामिक मानते हैं और वे पूरे देश में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। इन आतंकियों के पास अब अमेरिका के घातक हथियार आ गए हैं जिससे वे जानलेवा हमले कर रहे हैं।
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